दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत को AI डीपफेक से सुरक्षा दी, मेटा को 72 घंटे में कंटेंट हटाने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत को उनके पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अंतरिम सुरक्षा दी है। कोर्ट ने मेटा को 72 घंटे के भीतर डीपफेक और फर्जी कंटेंट हटाने और सरकार को चिन्हित वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कंगना रनौत को उनके पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। इस आदेश के बाद अब कोई भी उनकी सहमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज या अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा, जिसमें AI डीपफेक और फर्जी भाषण भी शामिल हैं।
8 अक्टूबर के अपने आदेश में जस्टिस विकास महाजन ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे कंगना द्वारा चिन्हित कंटेंट को आदेश मिलने के 72 घंटे के भीतर हटा दें। इसी समय सीमा के भीतर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को इंटरनेट और टेलीकॉम प्रोवाइडर्स को उन वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का निर्देश देना होगा जिनकी पहचान अभिनेत्री ने की है।
यह आदेश काफी व्यापक है। इसमें सिंथेटिक मीडिया, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और ऑडियो, मनगढ़ंत भाषण, फर्जी विज्ञापन और किसी की नकल करना शामिल है। यह रोक अज्ञात प्रतिवादियों (John Doe) पर भी लागू होती है। कोई भी ऐसा पेज, अकाउंट, चैनल या वेबसाइट नहीं चला सकता जो यह झूठा दावा करे कि कंगना उनका समर्थन करती हैं या उनसे जुड़ी हैं।
कोर्ट ने गौर किया कि रिकॉर्ड में पेश की गई कुछ सामग्री पहली नजर में अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट लग रही थी, और ऐसा प्रतीत होता है कि इसे AI या छेड़छाड़ के जरिए बनाया गया है। कोर्ट ने उस फैक्ट-चेक रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया जिसमें एक तस्वीर को अभिनेत्री ने फर्जी बताया था।
अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस महाजन ने कहा कि वादी की छवि और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचने की आशंका प्रथम दृष्टया वास्तविक और मौजूद है। उन्होंने कहा कि फर्जी क्लिप्स जिसमें किसी व्यक्ति को वह कहते या करते हुए दिखाया जाता है जो उन्होंने कभी नहीं किया, वे आम दर्शकों को गुमराह कर सकती हैं। यह जोखिम तब और बढ़ जाता है जब किसी व्यक्ति की फोटो और उनके वर्तमान पद का इस्तेमाल मनगढ़ंत बयानों के साथ किया जाता है।
अभिनेत्री और बीजेपी सांसद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट साकेत सीकरी ने तर्क दिया कि यह कंटेंट उनके व्यक्तित्व, प्रचार, पहचान और गरिमा के अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में उनके दो दशकों से अधिक के फिल्मी करियर और हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से सांसद होने का जिक्र किया गया है।
प्रथम दृष्टया मजबूत मामला पाते हुए कोर्ट ने कहा कि केवल पैसे से उनकी छवि को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। ये निर्देश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेंगे।






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